धन्य धन्य वृषभानु दुलारी

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 74 of 92

(राग बिलावल) धन्य धन्य वृषभानु दुलारी। धनि माता धनि पिता धन्य वृज धनि तेरी उपजाई प्यारी॥1॥ धन्य दिबस धनि निसा तबहिकी धन्य घड़ी धन जाय। धन्य कान्ह तेरौ बड़भागी, धनि बस कीन्है श्याम॥2॥ धनि मति धनि गति धनि तेरौ हित धन्य भक्ति धनि भाव। 'सूरश्याम' पति धन्य नारि तू, धनि-धनि एक स्वभाव॥3॥ - श्री सूरदास, सूरसागर, राधा कृष्ण (94) (राग बिलावाला) धन्य धन्य वृषभानु दुलारी। धन्य है माता, धन्य है पिता, धन्य है वृक्ष, धन्य है तेरी फसलें, प्रिये। आपको सौभाग्य का वरदान मिले, आपको शुभ कामनाओं का आशीर्वाद मिले। 'सुरश्याम' पति तुम धन्य नारी हो, धनी स्वभाव हो। 3. - श्री सूरदास, सूरसागर, राधा कृष्ण (94)
ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनिदोऊ राजत स्यामा स्याम