ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 79 of 92
(राग सारंग)
माधौ मोहिँ करौ वृंदावन-रेनु।
जिहिँ चरननि डोलत नँद-नंदन, दिन-प्रति बन-बन चारत धेनु॥ [1]
कहा भयौ यह देव-देह धरि, अरु ऊँचें पद पाएँ ऐनु।
सब जीवनि लै उदर माँझ प्रभु, महा प्रलय-जल करत हौ सैनु॥ [2]
हम ते धन्य सदा वै तृन-द्रुम, बालक-बच्छ-बिषनाऽरू बेनु।
सूर श्याम जिनकें सँग डोलत, हँसि बोलत, मथि पीवतु फेनु॥ [3]
- श्री सूरदास, सूरसागर (1107)
(राग सारंग) माधौ मोहिं करौ वृन्दावन-रेणु। जिहिन चरणनि दोलत नंद-नंदन, दीना-प्रति बन-बन चरत धेनु। [1] कह भयौ याह देव-शरीर धारी, अरु अचेन पद कलम ऐनु। सब जीवन में उदार प्रभु, तुम करो महा बाढ़-जल, सैनु.. [2] कृपा हम पर सदा आपकी, त्रिन-ढोल, बालक-बाल-बिश्नारु बेनु। सूर श्याम जिंकैन संग दोलत, हांसी बोलत, माथि पिवतु फेनु.. [3] - श्री सूरदास, सूरसागर (1107)