ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 80 of 92
मैं ब्रजवासिन की बलिहारी।
जिनके संग सदा हैं क्रीडत श्री गोवर्धनधारी॥ [1]
किनहू के घर माखन चोरत किनहूं के संग दानी।
किनहू के संग धेनु चरावत हरि की अकथ कहानी॥ [2]
किनहूं के संग यमुना के तट बंसी टेर सुनावत।
सूरदास बलि बलि चरनन की इह सुख मोहिं नित भावत॥ [3]
- श्री सूरदास, सूरसागर, उद्धव संदेश (146)
मैं ब्रजवासिन का भक्त हूं. जिनके साथ कृदत श्री गोवर्धनधारी सदैव रहते हैं.. [1] किनाहू के घर से माखन चुराने वाले किनाहू के साथ दान करो। किनाहु संग धेनु चरावत हरि की अनकही कहानी.. [2] किनाहु संग धेनु चरावत हरि की कहानी, तात बंसी टेर सुनावत। सूरदास बाली बाली चरणन का आनंद नीता भावत को मोहित कर देता है। [3] - श्री सूरदास, सूरसागर, उद्धव सन्देश (146)