जौ हम भले बुरे तौ तेरे

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 81 of 92

(राग धनाश्री) मैं कैसें रस रासहिं गाऊँ। श्री राधिका स्याम की प्यारी, कृपा बास ब्रज पाऊँ॥ [1] आन देव सपनैंहू न जानौ, दंपति कौं सिर नाऊँ। भजन-प्रताप, चरन-महिमा तैं गुरु की कृपा दिखाऊँ॥ [2] नव निकुंज बन धाम-निकट इक, आनँद-कुटी रचाऊँ। सूर कहा बिनती करि बिनवै, जनम-जनम यह ध्याऊँ॥ [3] - श्री सूरदास, सूरसागर (राग धनाश्री) रस रसहिं कैसे गाऊं। स्याम की प्रिय श्रीराधिका, कृपा करो ब्रज पौन। [1] अन देव सपनैंहु नहिं जनौ, युगल कौन सिर नौं। क्या मैं स्तुति, महिमा, चरण और महिमा के साथ गुरु का आशीर्वाद दिखा सकता हूं.. [2] मेरे निकट एक नया अभयारण्य और मेरे निकट आनंद का स्थान बनो। सूर कह बिनती करि बिनवै, जनम जनम ये ध्यान.. [3] - श्री सूरदास, सूरसागर
ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनिऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि