राधा माधव भैंट भई
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 84 of 92
(राग आसावरी)
राधा माधव भैंट भई।
राधा माधव माधव राधा,
कीट - भंग - गति होई जो गई॥ [1]
माधव राधा के रंग राचे, राधा माधव रंग रई।
माधव राधा प्राति निरंतर, रसना कही न गई॥ [2]
विहंसि कह्यौ हम तुम नहीं, अन्तर यह कहि व्रज पठई।
'सूरदास' प्रभु राधा माधव वृज विहार नित नई नई॥ [3]
- श्री सूरदास, सूरसागर, द्वारिका चरित (50)
(राग आसावरी) राधा माधव भेंट भाई। राधा माधव माधव राधा, किट - भंग - गति होई जो गाई.. [1] माधव राधा के रंग रचे, राधा माधव रंग रै। माधव अटल रहे राधा के प्रति, रसना कही न गाई। [2] विहंसि कहौ हम तुम नहीं, भेद कहौ व्रज पथाई। 'सूरदास' प्रभु राधा माधव व्रज विहार नित नई नई.. [3] - श्री सूरदास, सूरसागर, द्वारका चरित (50)