और कहाँ ते सुमरिये
Utkntha Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 10 of 15
कठिन मनोरथ मन उठे, को पुरनि करे आनि।
कृपा करेंगी लाड़िली, दीन दुखी मोहि जानि॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (106)
आपके मन में जो भी इच्छाएं उठें, उन्हें पुराना बना लें। जुझारू, निराश्रित मोहि जानि को मनाओगे? - श्रीमाधुरी दास, उत्कंठमाधुरी (106)