और कहाँ ते सुमरिये

Utkntha Madhuri — श्री माधुरी दास

Verse 11 of 15

नैनन सों नैना मिले, मुख सौं मुख लपटाय। भुज अरुझे सुरझे नहीं, रहे सुरति सुरझाय॥ - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (187) सौ आंखें मिलीं, सौ चेहरे गायब। भुज अरुझे सुरजे नहीं, सुरति सुरजे है.. - श्री माधुरी दास, उत्कंठ माधुरी (187)
और कहाँ ते सुमरियेश्री वृंदावन स्वामिनी करि सुदृष्टि इहि ओर