और कहाँ ते सुमरिये

Utkntha Madhuri — श्री माधुरी दास

Verse 9 of 15

कहा करूँ कासों कहूँ, को बूझे कित जाउँ। वन वन ही डोलत फिरों, बोलत लेले नाउँ॥ - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (29) मैं कैसे कह सकता हूं, किट जौन को बुझाओ? वान वान हाय डोलत फ़िरुन, बोल्ट लेले नौं.. - श्री माधुरी दास, उत्कंठ माधुरी (29)
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