और कहाँ ते सुमरिये
Utkntha Madhuri — श्री माधुरी दास
Verse 3 of 15
और कहाँ ते सुमरिये, लीला रास विलास।
रा अक्षर के कहत ही, होत कम्प अरु स्वास॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (112)
और कहाँ याद है, लीला रस विलास? रा अक्षर कहता है हाय, होता कांप अरु स्वास.. - श्री माधुरी दास, उत्कंठ माधुरी (112)