और कहाँ ते सुमरिये

Utkntha Madhuri — श्री माधुरी दास

Verse 7 of 15

जो वन वन डोलत रहों, बाँध मिलन की फेंट। अन जाने ही होयगी, कहूँ अचानक भेंट॥ - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (30) जो वान वान डोल्ट राहोन, बैंड मिलान के फ़िंट। जरूर जेन, कहूँ अचानक मुलाक़ात.. - श्री माधुरी दास, उत्सुख माधुरी (30)
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