और कहाँ ते सुमरिये

Utkntha Madhuri — श्री माधुरी दास

Verse 8 of 15

कान कथा मन ध्यान, रसना नाम अधार धरि। नयनन गति नहिं आन, बिन देखे मुख माधुरी॥ - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (26) कण-कण कथा मन ध्यान रसना नाम अधर धारी। माधुरी अपनी नजरें नहीं हटातीं, बिना देखे ही अपना चेहरा दिखा देती हैं.. - श्री माधुरी दास, उत्कंठ माधुरी (26)
और कहाँ ते सुमरियेऔर कहाँ ते सुमरिये