मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 10 of 18

प्रेम पारखी जो मिले, ताको करि मनुहार। तिन सों प्रिया प्रीतम मिले, सब सुख दीजे वार॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (30) प्यार तो प्यार की कसौटी है, जो भी मिलता है वो हमें खुश कर देता है। आपके प्रिय के तीनों पुत्र मुझे सर्व सुख दें.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (30)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय