मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 9 of 18

पतितन में विख्यात हों, महापतित मम नाम। अब याचक होय जाच हो, शरणागति सब याम॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (17) गिरा हुआ मनुष्य सफल हो, गिरे हुए को कोटि-कोटि प्रणाम। अब आपकी मनोकामना पूरी हुई, समर्पण से सब कुछ संभव है.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (17)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय