मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 11 of 18

रसिक जन बहु ना मिले, सिंह यूथ नहिं होय। विरह बेल जहाँ तहाँ नहीं, घट घट प्रेम न होय॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (51) अगर रोमांटिक इंसान को बहू न मिले तो उसे शेर जैसी जवानी नहीं मिलती। जहाँ न विरह है, न प्रेम है, न प्रेम है... - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (51)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय