मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 13 of 18

श्री वल्लभ वर को छांडि के, भजे जो भैरव भूत। अंत फजीती होयगी, ज्यों गणिका को पूत॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (59) दूल्हे श्रीवल्लभ के लिए भैरव भूत ने चाँदी भेजी। अंत में वेश्या के पुत्र के समान कष्ट भोगना पड़ता है.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (59)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय