मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय
Verse 15 of 18
श्री वृंदावन के दरस ते, भये जीव अनुकूल।
भवसागर अथाह जल, उतरन को यह तूल॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (71)
श्री वृन्दावन की कृपा से प्राणी मैत्रीपूर्ण हैं। भवसागर का अर्थ है जल, अवतार इसी के समान है.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (71)