मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 16 of 18

श्री वृंदावन के वृक्ष को, मरम न जाने कोय। एक पात को सुमर के, आप चतुर्भुज होय॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (73) श्री वृन्दावन के वृक्ष का अर्थ कोई नहीं जानते। एक पत्ते को समेटने से चतुर्भुज बन जाता है.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (73)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय