मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 3 of 18

हरि जन आवे बारने, हँसी हँसी नावे शीश। उनके मन की वे जाने, मेरे मन जगदीश ॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (27) हरि जन और बराने, हांसी हांसी नव शीश। उनके मन में उनका जन्म है, मेरे मन में जगदीश है.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (27)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय