मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 5 of 18

जागत सोवत स्वप्न में, भोर द्योस निश सांझ। श्री वल्लभ व्रज ईश के, चरण धरो हिय माँझ॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (35) जगत सोवत स्वप्न पुरुष, भोर द्योस निश सांझ। श्री वल्लभ व्रज प्रभु के चरण पकड़ो... - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (35)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय