मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 8 of 18

मन नग ताको दीजिये, जो प्रेम पारखी होय। नातर रहिये मौन व्हे, काहे जीवन खोय॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (29) अपना दिल उस साँप को दे दो जो प्यार को परख सके। वे चुप रहते हैं, क्यों जीवन खोते हैं.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (29)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय