अहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरि
Vinay Kundaliyan — श्री अलबेली अलि
Verse 4 of 11
जो चाहौ सो करौ कुँवरि, त्रिविध तम हरना।
अलबेलीअलि परी आनि, पद-पंकज-सरना॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (17)
जो चाहो करो कुंआरी, तीन तरह से तुम्हारा अपहरण होगा। अलबेलियाली परी आणि, पद-पंकजा-सरना.. - श्री अलबेलियाली अली, विनय कुंडलियान (17)