तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल

Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव

Verse 16 of 19

(राग सारंग) प्यारी ! नैंकु निरखौ नवरंग लालैं। तुव पद पंकज तल रज बंदत तिलक लगावत भालैं॥ [1] तेरे वरन वसन आभूषण उरधरि चम्पक मालैं। श्री बीठल विपुल विनोद करहु मिलि भुज भरि बाहु विसालैं॥ [2] - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (19) (राग सारंग) प्रिये! नैनकु निरखौ नवरंग ललैन। तुव पद पंकज ताल राज बांधत तिलक लगावत गंगान..[1] तेरा वर्ण वासन आभूषण उराधारी चंपक मलैं। श्री विट्ठल विपुल विनोद कराहु मिलि भुज भारी बहु विसलैं.. [2] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (19)
तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लालतें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल