तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल

Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव

Verse 17 of 19

(राग सारंग) तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल। [1] जिहिं गुन सर्बसु चोरि लियौ नागरि, ते गुन अब प्रतिपाल॥ [2] तैं कछु प्रेम-ठगौरी मेली, तुव मुख जोवत नैंन बिसाल। [3] भाँमिनि कनक लता ह्वै लपटी, श्रीबीठल विपुल उर स्याम तमाल॥ [4] - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (18) (राग सारंगा) तेन मोहयौ प्यारी मेरौ लाल। [1]. [3] भनमिनि कनक लता ह्वै लपति, श्री विट्ठल विपुल उर स्याम तमाल.. [4] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (18)
तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लालप्यारी तेरे नैननि पर तृण टूटत