लाल करत तेरे गुन गानैं

Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव

Verse 3 of 19

(राग सारंग) लाल करत तेरे गुन गानैं। जो न पत्याहु, सपथ नहिं मानति, चली सुनि अपने कानैं॥ [1] जो तुम स्याम होहु वे स्यामा, तौ यह बेदन जानैं। श्रीबीठलविपुल विनोद बिहारी, सौं बादि रूसनौ ठानैं॥ [2] - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (21) (राग सारंगा) तेरे गुण गाऊं लाल करत। जो छोड़ता नहीं, स्तुति खाता नहीं, मेरी बात सुन प्रिये.. [1] यदि तू काला है, तो जान ले कि यह शरीर काला है। श्री विट्ठल विपुल विनोद बिहारी, सौ बड़ी रुस्नू पुलिस स्टेशन.. [2] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (21)
जिन रूठौ लागौं तिय पैयाँलालहिं बस करनी, मदन मन हरनी