लाल करत तेरे गुन गानैं
Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव
Verse 5 of 19
(राग सारंग)
मेरौ लाल रंगीलौ रंग भर्यौ। [1]
जो भावै सो करहु किसोरी
मोहन तेरे बस पर्यौ॥ [2]
जमुना - पुलिन निकुंज - भवन में,
सर्वसु सचि तो कौं धर्यौ। [3]
श्रीबीठलविपुल विनोद बिहारी,
सगुन गाँठि दै बर जु बर्यौ॥ [4]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की वाणी (23)
(राग सारंगा) मुझमें लाल रंग भर दो। [1] भवई, तुम कुछ भी करो, किसोरी मोहन, मैं तुम पर आश्रित हूं.. [2] जमुना - पुलिन निकुंज - भवन पुरुष, सर्वसु साची तो कौन धरयौ। [3] श्री विट्ठल विपुल विनोद बिहारी, सगुण गांठि दाई बर जू बरयौ.. [4] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की वाणी (23)