करैं मनोरथ पिय के जो कछु उपजै जीय
Vrindavan Madhuri Md — श्री माधुरी दास
Verse 2 of 5
जो लालच कोटिक मिले, तौन चित्त ललचाय।
तजि वृंदावन माधुरी, सुपने अनत न जाय॥
- श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (93)
चंद मील का लालची कौन है, लालची है तेरा दिल। तजि वृन्दावन मधुरी, सुपने अनात न जाई.. - श्री माधुरी दास, वृन्दावन माधुरी (93)