ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि

Vrindavan Madhuri Rr — श्री रूपरसिक देवाचार्य

Verse 10 of 14

वृंदावन को नाम सुनि, जिनकें हियैं हुलास। सबतैं उत्तम जानि जिहिं, रहियें तिनकैं पास॥ - श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (32) वृन्दावन नाम सुनो, जिनको दुःख होता है। सबतैन उत्तम जानि जिहिन, रहिअन तिनकैन पस.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, श्री वृन्दावन माधुरी (32)
ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहिब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि