श्री वृंदावन माधुरी
Vrindavan Madhuri Rr
श्री रूपरसिक देवाचार्य · 14 verses · Braj
- 1. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 2. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 3. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 4. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 5. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 6. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 7. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 8. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 9. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 10. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 11. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 12. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 13. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
- 14. ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि