ब्रह्मादिक वंछित रहैं, वृंदावन रज आंहि
Vrindavan Madhuri Rr — श्री रूपरसिक देवाचार्य
Verse 3 of 14
चारि वेद षदशास्त्र, अष्टादश जु पुरान।
सकल सार कौ सार है, वृंदावन को ध्यान॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, श्री वृंदावन माधुरी (80)
चारि वेद, षडशास्त्र, अष्टादश जू पुराण। सकल सार क्या है, वृन्दावन में ध्यान करो.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, श्री वृन्दावन माधुरी (80)