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गीतामृत गंगा
गीतामृत गंगा
Gitamrit Gnga
श्री वृंदावन देवाचार्य · 4 verses · Braj
1. कबहुँ न विछुरै जोरि यह, दम्पति जनमन चोर
2. कबहुँ न विछुरै जोरि यह, दम्पति जनमन चोर
3. नेह निगौड़े को पैडौ ही न्यारौ
4. कबहुँ न विछुरै जोरि यह, दम्पति जनमन चोर